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मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था??(Did Prithviraj chauhan killed Mohmmad ghauri?)

Did Prithviraj Chauhan killed Mohmmad Ghauri????? मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था? सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने अथवा खोखर राजपूतो ने??...

Wednesday, July 20, 2016

बाबा मतीजी मिन्हास,जो सर कटने पर भी गौरक्षा/ब्राह्मण कन्या की रक्षा के लिए विधर्मियों से लड़ते हुए शहीद हो गए,Baba mati ji minhas

RAJPUT LEGEND OF PUNJAB- "BABA MATI JI MINHAS"

बाबा मतीजी मिन्हास

ऐसी मिसाल पुरी दुनिया में मिलनी मुश्किल है,जब असहाय की पुकार सुनकर ओर धर्म युद्ध के लिए अपनी शादी अधूरी छोड़कर अपने जीवन की आहुती भेंट कर दी हो,  ऐसी मिसाल एक राजपूत ही पेश कर सकता है ! धन्‍य हों मतीजी मनहास जिनका सर काटने के बाद भी धड़ दुश्मनों के सर काटता रहा।

There are many sagas in rajput history singing glories of the brave men who kept fighting even after they were beheaded.  One of such sagas is of the Veer Baba Matiji Minhas.

बाबा मतीजी मिन्हास और उनके परिवार का इतिहास ----------

बीरम देव मिन्हास जी ने बाबर की इब्राहिम लोधी (जो की दिल्ली के तखत पर बैठा था ) के खिलाफ युद्ध में सहायता की थी ! इनका एक पुत्र श्री कैलाश देव पंजाब के गुरदासपुर के इलाके में बस गया ! कैलाश देव मिन्हास जी के दो पुत्र कतिजी और मतीजी जसवान ( दोआबा का इलाका जहां जस्वाल राजपूत राज करते थे) में  विस्थापित हो गए ! यहाँ पर दोनों भाई जस्वाल राजा की सरकार में ऊँचे ओधे पर काम करने लगगए ! जसवां के जसवाल राजपूत राजा ने इनकी बहादुरी और कामकाज को देख कर इनाम में जागीर दी , जो की होशिारपुर का हलटा इलाका है ! कहा जाता है की , मतिजी जो शादी का दिन था , और वह अपनी शादी में फेरे ले रहे थे ,तभी एक ब्राह्मण लड़की ने शादी में ही गुहार लगाई की उसका गाव मुस्लमान लुटेरे लूट रहे है , गऊ माता को काट रहे है , लड़कीओ को बेआबरु कर रहे है , गाव को तहस नहस कर रहे है ! मतिजी  ने क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए , और एक सच्चे राजपूत की भांती आधे फेरे बीच में ही छोड़कर उन मुस्लमान लुटेरों को मार भगाया , लेकिन इस बीच एक दुश्मन के वार से उनका सर धड़ से अलग हो गया , लेकिन वह फिर भी बिना सर के ही उनसे लड़ते रहे , यह नज़ारा देख दुश्मन भागने लगे , मतिजी ने उनका कुछ दूर तक बिना सर के पीछा किया लेकिन वह सब मैदान छोड़ कर दौड़ गए !

बाबा मतीजी दरोली के स्थान पर वीर गति को प्राप्त हुए ! उनकी होने वाली पत्नी ( क्यूंकि शादी पूरी नही हुए थी ) श्रीमती सम्पूर्णि जी (जो की नारू राजपूत थी ) भी  उनके साथ ही अलग चिता में सती होगई ! क्युकी उनकी शादी अधूरी थी इस लिया उन्हें अलग चीता में बिलकुल मतीजी की चीता के साथ सती होने की अनुमति दी गई थी ! आज उन दोनो के स्थान दरोली में साथ साथ है जहां उन्हें अग्नि दी गई थी !

इस प्रकरण के बाद उनके भाई कतीजी ने अपनी जागीर को बदलवाकर  दरोली  ले ली थी , जहां उनके भाई शहीद हुए थे ! यह स्थान मन्हास राजपूतो के जठेरे/पितृ है , क्योंकी गुरु गोबिंद सिंह जी के समय में इस स्थान और आस पास के राजपूत परिवार सिक्ख बन गये थे , बिलकुल बाबा मतीजी और सम्पूर्णिजी की स्थान के साथ ही एक भवय गुरुद्वारा बाबा मतिजी के नाम से बनवाया गया है !

एक बात बताना चाहता हुँ खालसा साजना के 40 - 50 वर्षो तक सभी तख्तो के जनरल , शस्त्र विद्या सिखाने वाले , ज्यादातर बहादुरी और  मैदान ए जंग में जौहर दिखाने वाले राजपूत योद्धा ही थे ,यह जुझारूपन उन्हें विरासत में मिला था ! गतका , शस्त्र विद्या , घुड़सवारी उनके पूर्वज हज़ारो साल से करते थे  ,और यह सब  उनके खून में ही था !

वैसे तो जठेरे/पितृ पूजन और सती पूजन सिक्ख धर्म में पूर्ण तरह मना है , लेकिन फिर भी हमारे सिक्ख राजपूत भाई आपने रीती रिवाज , और अपने राजपूत होने पर पूरा गर्व करते है और राजपूतो में ही शादी करवाते है !

जय क्षत्रिय धर्म  !!

जय राजपुताना  !!

Post credit---rajput of himalaya

Saturday, July 16, 2016

बिहार के शूरवीर क्षत्रिय राजपूत वंश (rajputs of bihar)

बिहार के क्षत्रिय राजपूत वंशो का विवरण--Rajputs of Bihar

बिहार -सदैव ही महानतम क्षत्रियों की भूमि रही है -जिस धरती पर त्रेतायुग ,द्वापरयग से लेकर कलयुग के 19 वी सदी तक कई महानतम क्षत्रिय वन्श व क्षत्रिय वीरों की राजधानी भी रही।
ये भूमि आज देश में मौजूद कई  क्षत्रियों (राजपूतों) के उत्तपति का गवाह भी रही है""।

आज जानते हैं बिहार के हर कोने कोने में फैलें कुछ प्रसिद्ध राजपूत शाखाएँ }
नीचे दिए सभी राजपूत वन्श बिहार के ज्यादातर जिलों में हैं यदि कोई शाखा विशेषतः यदि किसी जगह पर अधिक होगे तो उन स्थानों का नाम लिखा होगा।

नोट: जहाँ "शाहबाद" लिखु वहाँ भोजपुर,बक्सर,डुमराव,रोहतास,कैमुर जिला एक साथ होगे।
जहाँ "मगध" लिखु वहाँ औरन्गाबाद,गया,नवदा,अरवल,जहानाबाद जिला एक साथ होगा।

1.परमार
 उज्जैन (परमार)
 गढवरिया(परमार)
ये महानतम राजपूत वन्श बिहार के हर कोने मे अधिक संख्या में हैं ,इन तीन नामों से जाने जाते हैं।

________________________________
 2.सिकरवार
(शाहबाद, मगध,सारण में अधिक)

3.राठौर( मारवाड़ भी कहे जाते हैं)
(शाहबाद व शिवहर,मुज्जफरपर में अधिक)

4.बिसेन

5.गाई (बिसेन की शाखा)
(शाहबाद में मिलते हैं)

6.रघुवंशी
(सिवान, सारण में अधिक मिलते हैं)

7.गहलोत

8.शक्तावत/भनावत" शिशोदिया"
 (मगध में अधिक हैं खास करके औरन्गाबाद व गया में )

9.शिशोदिया

10.गहडवाल/गह्ढवाल/गहरवार

11. निकुम्भ

12.बुन्देला  
  (हजारीबाग व नवादा में गढ  हैं इनका)    

13.महरोड
(ज्यादातर शाहबाद में मिलते हैं)

14.चौहान

15.सोलंकी

16.सोनवान(सोलंकी)

17.बघेल (सोलंकी)

18.त्रिलोकचंदी (बैस)
 (शाहबाद,सितामढि में अधिक,  )

19.सिरमौर ( त्रिलोकचंदी बैस) अथवा प्राचीन मौर्य वंशी
  (मगध में मिलते हैं)।

20.जादोन

21.श्रीनेत(निकुम्भ की शाखा)
 (जमुइ ,बान्का में अधिक)
   
22.सान्ढा(भारद्वाज गोत्र)
  (रोहतास व मगध)

23.नरोनि (परिहार)प्रतिहार
 (शाहबाद )

24.परिहार प्रतिहार

25.तोमर

26.तिलोता(तोमर)

27.सोमवंशी(चन्द्रवंशी)

28.कन्दवार (गौतम की शाखा)
 (मगध में मिलते हैं)

29.सुरवार (गौड़ की शाखा)
(शाहबाद व शेखपुरा,सारण में अधिक)

30.काकन (सूर्यवंशी)
(शाहबाद में अधिक)

31.किनवार (दिखित) दीक्षित

32.कछ्वाह

33.कुरुवंशी (जरासन्ध का वंश,जिसने मगध पर 2800 वर्ष पूर्व तक राज किया था)
(शाहबाद,छपरा,मगध)

34.लोहतमिया

35.बराहिया(सेंगर)
(तिरहुट,मुन्गेर में अधिक  मिलते हैं)

36.सेंगर

37.हरिवोवंशी (हैहयवंशी राजपूत)
 (शाहबाद में मिलते हैं)

38.सूर्यवंशी (मूल सूर्यवंशी,प्राचीन पाल राजवंश इन्ही का साम्राज्य था)

39.भाटी
(भदावर गाँव भोजपुर)

40.गौतम

41.निमिवंशी (सूर्यवंशी)माता सीता का वंश

42.चन्देल

43.कर्मवार (गहरवार की शाखा)

44.बेरुवार (तोमर)
  (मिथिलान्चल क्षेत्र)

45.दोनवार (विशेन की शाखा)

46.देकहा

47.पालीवार/ल(चन्द्रवंशी)
(नार्थ बिहार के गोपालगंज में इनके गाँव हैं)

48.रक्सेल

49.बैस

50.नागवंशी (अधिकतर झारखण्ड में)

बिहार से शुद्ध मौर्य कुशवाह(कछवाहा) क्षत्रिय मालवा और पश्चिमी भारत में चले गए और जो बचे वो अवनत होकर कोइरी काछी और कुर्मियो में मिल गए,..
बिहार के राजपूत बाबूसाहेब/सिंह साहेब टाइटल से जाने जाते हैं और बिहार में शुद्ध राजपूतों की कुल संख्या बिहार की कुल जनसंख्या का 7% है इस प्रकार बिहार में लगभग 80 लाख शुद्ध राजपूत हैं जो यूपी के बाद सर्वाधिक हैं

जय बिहार
जय बाबू वीर कुवर सिंह जी"तेगवा बहादुर",जय आनन्द मोहन सिंह
लेखक--ठाकुर अमित सिंह उज्जैन (परमार)

Friday, July 15, 2016

शहीद उदासिंह राठौड़ जी,एक वीर सिख राजपूत यौद्धा

सिक्ख धर्म की स्थापना में राजपूतों का योगदान भाग-5

वीर सिक्ख राजपूत यौद्धा शहीद भाई ऊदा जी राठौड़ (रमाने राठौड़)

श्री गुरु तेगबहादुर जी की दिल्ली के चांदनी चौंक में हुई शहादत के पश्चात उनके पावन धड़ का अंतिम संस्कार भाई लक्खी राय जी ने अपने घर को आग लगाकर कर दिया गया ।
दूसरी तरफ भाई जैता जी गुरु साहिब के शीश को उठा के चल पड़े । रास्ते में उनके पिता भाई अाज्ञा जी,भाई नानू जी व भाई ऊदा जी उनसे आ मिले ।
ये चारों सिख दिन रात सफर करके श्री आनंदपुर साहिब पहुंचे ।
गुरु गोबिन्द सिंघ जी ने सभी को प्यार दिया व विशेष रूप से भाई जैता जी को रंघरेटा गुरु का बेटा कह के सम्मान दिया ।
भाई अाज्ञा जी व भाई जैता जी रंघरेटा जाति से संबंध रखते थे और दिल्ली निवासी थे ।
भाई नानू जी छींबा जाति से संबंध रखते थे और वो भी दिल्ली निवासी थे ।
भाई ऊदा जी राठौड़ राजपूत घराने से संबंध रखते थे और उनकी शाखा "रमाने" थी ।
भाई ऊदा जी का जन्म राव खेमा चंदनीया जी के घर 14 जून 1646 ईस्वी को हुआ ।
आप राव धर्मा जी राठौड़ के पोते व राव भोजा जी राठौड़ के पड़पोते थे ।
आप की उस्ताद भाई बज्जर सिंघ जी राठौड़ के साथ भी रिश्तेदारी थी क्योंकि "उदाने" व "रमाने" दो सगे भाईयों राव ऊदा जी राठौड़ व राव रामा जी राठौड़ के वंशज हैं ।
भाई ऊदा जी, गुरु गोबिन्द सिंघ जी व सिख सेना द्वारा लड़े गये भंगाणी के युद्ध में 18 सितंबर 1688 को शहीद हुए थे । उनके साथ गुरु गोबिन्द सिंघ जी की बुआ बीबी वीरो जी के सुपुत्र भाई संगो शाह जी व भाई जीत मल जी एवं राव माई दास जी पंवार के पुत्र भाई हठी चंद भी शहीद हुए थे ।
भाट बहियों/ख्यातों में उनकी शहीदी का जिक्र है-

"ऊदा बेटा खेमे चंदनिया का पोता धरमे का पड़पोता भोजे का, सूरज बंसी गौतम गोत्र राठौड़ रमाना, गुरु की बुआ के बेटे संगो शाह, जीत मल बेटे साधु के पोते धरमे खोसले खत्री के गैल रणभूमि में आये । साल सत्रह सै पैंतालीस असुज प्रविष्टे अठारह, भंगाणी के मल्हान, जमना गिरि के मध्यान्ह ,राज नाहन, एक घरी दिहुं खले जूझंते सूरेयों गैल साह्मे माथे जूझ कर मरा । गैलों हठी चंद बेटा माई दास का, पोता बल्लू राय का, चन्द्र बंसी, भारद्वाज गोत्र,पंवार,  बंस बींझे का बंझावत, जल्हाना, बालावत मारा गया ।"
    (भाट बही मुलतानी सिंधी, खाता रमानों का)

भाई ऊदा जी सूर्यवंशी राठौड राजपूत वंश के शासक वर्ग से संबंध रखते थे। वो मारवाड के राठौड राजवंश के वंशंज थे --
**वंशावली**
राव सीहा जी
राव अस्थान
राव दुहड
राव रायपाल
राव कान्हापाल
राव जलहनसी
राव छाडा जी
राव टीडा
राव सल्खो
राव वीरम देव
राव चूंडा
राव रिडमल
राव लाखा (राव जोधा के भाई)
राव जौना
राव रामजी
राव सल्हा जी
राव नाथू जी
राव रामा जी
राव रणमल जी
राव भोजा जी
राव धर्मा जी
राव प्रेमा चंदनिया जी
भाई ऊदा जी

लेखक---श्री सतनाम सिंह जी (ग्रेटर कैलाश)

Monday, July 4, 2016

आलम सिंह चौहान नचणा जी,वीर सिक्ख राजपूत यौद्धा(Alam singh chauhan nachna, great sikh rajput warrior


सिक्ख धर्म की स्थापना में राजपूतों का योगदान भाग--4
****भाई आलम सिंह चौहान "नचणा" जी शहीद****

भाई आलम सिंह जी , चौहान राजपूत घराने से संबंध रखते थे।
सूरज प्रकाश ग्रंथ,भट्ट बहियों,गुरु कीआं साखीयां आदि रचनाओं में इसका स्पष्ट उल्लेख है ।
"आलम सिंघ धरे सब आयुध,जात जिसी रजपूत भलेरी ।
खास मुसाहिब दास गुरु को,पास रहै नित श्री मुख हेरी ।
बोलन केर बिलास करैं, जिह संग सदा करुणा बहुतेरी ।
आयस ले हित संघर के,मन होए आनंद चलिओ तिस बेरी ।"
(सूरज प्रकाश ग्रंथ- कवि संतोख सिंघ जी..रुत 6,अंसू 39,पन्ना 2948)

भाई आलम सिंह जी का जन्म दुबुर्जी उदयकरन वाली,जिला स्यालकोट (अब पाकिस्तान) में सन् 1660 हुआ,जो उनके पूर्वजों ने सन् 1590 में बसाया था ।
भाई आलम सिंह जी के पिता राव (भाई)दुर्गा दास जी, दादा राव (भाई)पदम राए जी, परदादा राव (भाई)कौल दास जी ,सिख गुरु साहिबान के निकटवर्ती सिख व महान योद्धा थे ।

भाई आलम सिंह जी के दादा के भ्राता राव (भाई ) किशन राए जी छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब जी द्वारा  मुगलों के खिलाफ लड़ी करतारपुर की जंग में 27 अप्रैल 1635 को शहीद हुए थे ।
भाई आलम सिंह जी सन् 1673 में 13 वर्ष की आयु में अपने पिता राव (भाई) दुर्गा दास जी के साथ गुरु गोबिन्द सिंह जी के दर्शन करने आए ।
गुरु जी ने उनको अपने खास सिखों में शामिल कर लिया । वो इतने फुर्तीले थे कि गुरु जी ने उनका नाम 'नचणा' रख दिया था ।

फरवरी 1696 में मुगल फौजदार हुसैन खान ने जब पहाड़ी राजपूत रियासत गुलेर पर आक्रमण किया तो वहां के राजा गज सिंह ने गुरु गोबिन्द सिंह जी से मदद मांगी । गुरु जी ने अपने चुनिंदा सेनापतियों के नेतृत्व मे सिख फौज भेजी । राजपूतों व सिखों की संयुक्त सेना ने मुगल फौज को बुरी तरह परास्त किया लेकिन इस युद्ध में भाई आलम सिंघ जी के ताऊ जी के 2 पुत्र कुंवर (भाई) संगत राए जी व कुंवर भाई हनुमंत राए जी शहीद हो गए । साथ में राव भाई मनी सिंह जी (पंवार) के भाई राव (भाई) लहणिया जी भी शहीद हुए ।
गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा जुल्म के खिलाफ लड़े गए हर युद्ध में भाई आलम सिंह जी की मुख्य भूमिका रही और बड़ी बात ये भी है कि वो गुरु गोबिन्द सिंघ जी के शस्त्र विद्या के उस्ताद भाई बज्जर सिंघ जी (राठौड़) के दामाद थे ।

भाई आलम सिंह जी के समस्त परिवार ने गुरु जी द्वारा मुगलों के खिलाफ युद्धों में मोर्चा संभाला व समय समय पर शहीदीयां दी ।
भाई आलम सिंह जी भी अपने एक भ्राता भाई बीर सिंह जी व अपने दो पुत्रों सहित चमकौर की जंग में 7 दिसंबर 1705 को शहीद हुए ।

भाई आलम सिंह जी की वंशावली 👉

महाराजा सधन वां (अहिच्छेत्र के महाराजा)
महाराजा चांप हरि
महाराजा कोइर सिंह
महाराजा चांपमान
महाराजा चाहमान (चौहान)
महाराजा नरसिंह
महाराजा वासदेव
महाराजा सामंतदेव
महाराजा सहदेव
महाराजा महंतदेव
महाराजा असराज
महाराजा अरमंतदेव
महाराजा माणकराव
महाराजा लछमन देव
महाराजा अनलदेव
महाराजा स्वच्छ देव
महाराजा अजराज
महाराजा जयराज
महाराजा विजयराज
महाराजा विग्रह राज
महाराजा चन्द्र राज
महाराजा दुर्लभ राज
महाराजा गूणक देव
महाराजा चन्द्र देव
महाराजा राजवापय
महाराजा शालिवाहन
महाराजा अजयपाल
महाराजा दूसलदेव
महाराजा बीसलदेव
महाराजा अनहलदेव
महाराजा विग्रह राज
महाराजा मांडलदेव
महाराजा दांतक जी
महाराजा गंगवे
महाराजा राण जी
महाराजा बीकम राय
महाराजा हरदेवल
महाराजा गोल राय
महाराजा गोएल राय
महाराजा गज़ल राय
राव उदयकरन जी
राव अंबिया राय
राव कौल दास
राव पदम राय
राव दुर्गा दास
राव आलम सिंह जी

लेखक---श्री सतनाम सिंह जी ग्रेटर कैलाश नई दिल्ली