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मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था??(Did Prithviraj chauhan killed Mohmmad ghauri?)

Did Prithviraj Chauhan killed Mohmmad Ghauri????? मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था? सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने अथवा खोखर राजपूतो ने??...

Monday, October 31, 2016

कारगिल युद्ध के अमर शहीद स्क्वाड्रन लीडर राजीव पुंडीर (Sqn Ldr Rajiv Pundir)


कारगिल युद्ध के शहीद स्क्वाड्रन लीडर राजीव पुंडीर-----

Sqn Ldr Rajiv pundir, Flying (Pilot) 
स्क्वाड्रन लीडर राजीव पुंडीर का जीवन परिचय------

शहीद राजीव पुंडीर का जन्म दिनांक 28 अप्रैल 1962 में ग्राम बड़ोवाला जिला देहरादून उत्तराखण्ड में ठाकुर राजपाल सिंह व हेमवती पुंडीर के घर हुआ। उन्होंने 1979 में राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी में प्रवेश कर सैन्य जीवन की शुरुआत की। इनका विवाह सहारनपुर के नकुड क्षेत्र के गांव में शर्मिला सिंह से हुआ।
शहीद पुंडीर एक बेहतरीन पायलट होने के साथ एक कुशल खिलाड़ी, गायक व संगीत प्रेमी थे।

कारगिल विजय और ऑपरेशन विजय----
वर्ष 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने भारतीय क्षेत्र में घुस कर कई महत्वपूर्ण चोटियों पर कब्जा कर लिया था। इन स्थानों को दुश्मनों से छुड़ाने के लिए आपरेशन कारगिल विजय शुरू किया गया। सैनिको ने बहादुरी का परिचय देते हुए देश की आन बान और शान बचाने को सर्वोच्च बलिदान दिया और यहां तिरंगा फहराया।

आपरेशन विजय के दौरान 28 मई 1999 को सरसावा वायुसेना स्टेशन पर तैनात स्क्वाड्रन लीडर राजीव पुंडीर और उनके साथियों ने शत्रुओं की गतिविधियों की जानकारी लेने और रसद पहुंचाने के लिए MI-17 लड़ाकू हेलीकॉप्टर से उड़ान भरी। उन्होंने अपने ऑपरेशन को भली भाँति अंजाम दिया।एक के बाद एक दुश्मनो के विरुद्ध विभिन्न चोटियों पर जमकर गोलीबारी की जिसमे कई दुश्मन हताहत हुए।

इसके बाद दुश्मनों के क्षेत्र में उनकी गतिविधियों का जायजा ले ही रहे थे कि पाकिस्तानी घुसपैठियों ने मिसाइल से उनके हेलीकाप्टर पर धावा बोल दिया।इन वीरों ने अदम्य साहस व वीरता का परिचय देते हुए अपने हेलीकाप्टर में आंतकियों द्वारा दागी गई मिसाइल लगने के बावजूद गोलीबारी जारी रखी और कई घुसपैठियों को मार गिराया।

मिसाइल की चपेट में आने से वायुसेना स्टेशन सरसावा के चार जांबाजों स्क्वाड्रन लीडर राजीव पुंडीर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस मुहिलन, सार्जेट पीवीएन आर प्रसाद तथा सार्जेट आरके साहू 28 मई 1999 को कारगिल में शहीद हुए थे।
जिस वक्त मात्र 37 वर्ष की आयु में स्क्वाड्रन लीडर राजीव पुंडीर शहीद हुए उनकी बेटी भव्या सात साल और बेटा करन केवल छह महीने का था।उनकी पत्नी को सरकार द्वारा पेट्रोल पम्प भी आवंटित किया गया।

इसके बाद थलसेना की विभिन्न बटालियनों ने अपनी जान पर खेलकर उच्च बलिदान देकर कारगिल की चोटियों से दुश्मन को मार भगाया।
वायुसेना के चारो शहीदों के नाम पर सरसावा वायुसेना स्टेशन के चार महत्वपूर्ण पथों का नाम रखा गया है और इन शहीदों की याद में यहाँ शहीद स्मारक बना हुआ है जिस पर प्रत्येक वर्ष इन्हें मोमबत्ती जलाकर श्रद्धासुमन अर्पित कर मेले का आयोजन किया जाता है।

सरकार ने आपरेशन विजय और शहीदों की याद में 26 जुलाई को विजय दिवस मनाने का निर्णय लिया। विजय दिवस के अवसर पर राष्ट्र के वीरों को शत शत नमन ।
जय हिन्द जय राजपूताना।
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Squadron Leader Rajiv Pundir, Flying (Pilot),
No. 152 Helicopter Unit, Mi-17 ,
KIA 28 May 1999

Squadron Leader Rajiv Pundir of the IAF was killed in action on 28 May 99 while flying as a co-pilot of a Mi-17 helicopter being flown in the attack role during a mission against infiltrator held ground positions within the Indian side of the line of control.

A graduate of the National Defence Academy and a post graduate in Military Studies from the prestigious Defence services Staff College, Sqn Ldr Pundhir was the Flight commander of a Mi-17 Helicopter Squadron. The officer displayed courage of an extremely high order and carried out successful combat missions against heavily defended ground targets. He made the supreme sacrifice during one such mission by carrying out attacks in a very hostile environment wherein the opposition on ground was known to possess a surfeit of surface to air missiles, in spite of which the officer carried out repeated attacks in the face of lethal enemy opposition.

His courageous action in the face of enemy fire contributed significantly to the support being given by the IAF to the Indian Army in its efforts to dislodge the intruders from our territory.

Sqn Ldr Rajiv Pundir was commissioned in the IAF on 28 Apr 83 and was an experienced Helicopter pilot experienced on, among other aircraft, the Heavy Lift Mi-26 Helicopter besides having 2500 hours on the Mi-8 and Chetak/Cheetah helicopters.

An alumni of St Josephs Academy, Dehradun Rajiv Pundir was a thorough professional with a zest for doing things well. A very enthusiastic and energetic young man he remained at the centre stage of all activity. A keen sportsman, he had a passion for music and was an accomplished singer.

Sqn Ldr Rajiv Pundir is survived by his wife Mrs. Sharmila Pundhir, a seven-year-old daughter Bhavya, and a four and a half-year-old son Karan.
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Reference-------------
1- http://www.bharat-rakshak.com/IAF/Personnel/Martyrs/199-9-Kargil.html
2-http://m.jagran.com/uttar-pradesh/saharanpur-9309699.html
3-http://m.amarujala.com/news/states/uttar-pradesh/saharanpur/Saharanpur-57649-50/

Saturday, October 29, 2016

लौहपुरुष ठाकुर राजनाथ सिंह ,देश के यशस्वी गृहमंत्री

ठाकुर राजनाथ सिंह, देश के यशस्वी गृहमंत्री-------

समुद्र मंथन के पश्चात् अमृत के साथ साथ हलाहल विष भी निकला था। अमृत देवताओं के हिस्से आया। देवतागण अमृतपान करके अमर हो गये। किन्तु ब्रह्माण्ड की रक्षा के लिए विषपान भगवान शंकर ने किया था। इसी से भगवान शिवजी नीलकंठ के नाम से प्रसिद्ध हुए।
आधुनिक काल में नीलकंठ की भूमिका जिस शख्स ने निभाई,उनका नाम है केन्द्रीय गृह मंत्री ठा० राजनाथ सिंह।
नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार घोषित कराने में राजनाथ सिंह की सशक्त भूमिका रही। बीजेपी के चुनाव अभियान में राजनाथ सिंह कंधे से कंधा मिलाकर मोदी जी के साथ खड़े रहे। ये मोदी लहर और राजनाथ सिंह की संगठन क्षमता का ही कमाल था कि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2014 में जबर्दस्त विजय प्राप्त की।राजनाथ ने हर बुराई अपने सर ले ली और सब श्रेय मोदी जी को लेने दिया।

----जीवन परिचय----
जन्म-10 जुलाई 1951 (आयु 64 वर्ष) , इनका जन्म रैकवार RAIKWAR राजपूत वंश में हुआ है
जन्मस्थान---भभौरा, चंदौली जिला, उत्तर प्रदेश, उनके पिता का नाम राम बदन सिंह और माता का नाम गुजराती देवी था।
जीवन संगी-सावित्री सिंह
संतान--2 पुत्र 1 पुत्री
विद्याअर्जन-गोरखपुर विश्वविद्यालय
पेशा -भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता
शुरू से आरएसएस और जनसंघ से जुड़े रहे।आपातकाल का जमकर विरोध किया।इंदिरा गांधी की जनसभा में अकेले दम पर जमकर हंगामा किया और काले झंडे दिखाए।तब से संघ परिवार की नजरो में छाने लगे।

----राजनितिक जीवन की शुरुआत----
आपातकाल के बाद हुए चुनाव में बेहद युवावस्था 26 वर्ष की आयु में पहली बार मिर्जापुर से विधायक बने।

80 के दशक में भाजयुमो के राज्य अध्यक्ष और उसके बाद राष्ट्रिय अध्यक्ष भी रहे।

कल्याण सिंह सरकार में 1991 में यूपी के प्रभावी शिक्षामंत्री रहे।इनके द्वारा लागु किये नकल और ट्यूशन विरोधी कानूनों ने शिक्षा माफियाओ को ध्वस्त कर दिया था और यूपीबोर्ड में नकल बन्द हो गयी थी। उन्होंने बोर्ड परीक्षा में नकल को गैर जमानती अपराध बना दिया। आज तक उन्हें इस कार्य के लिए याद किया जाता है। इसके अलावा उन्होंने दोबारा इतिहास लिखवा कर इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव करवाया और वैदिक गणित को पहली बार पाठ्यक्रम में शामिल किया।

उनके मंत्री के रूप में कामकाज, ईमानदारी और लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें जल्द ही भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष बना दिया गया। प्रदेशाध्यक्ष के कार्यकाल में कार्यकर्ताओ में इतनी लोकप्रिय हुए कि उन्हें जल्द ही 1999 में वाजपेयी सरकार में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री बना दिया गया।

----मुख्यमंत्रिकाल----
राजनाथ सिंह जी सन् 2000–2002 के बीच यूपी के मुख्यमन्त्री रहे।
प्रदेश में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें 2000 में केंद्र से वापिस बुलाकर उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया। इस कार्यकाल में उन्होंने आरक्षण व्यवस्था को ठीक करने के लिये कड़े कदम उठाए। उन्होंने पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित वर्ग में विभाजन को लागू किया जिससे आरक्षण का लाभ वास्तविक अति पिछडो तक पहुँचे। लेकिन जातिवाद से ग्रस्त कोर्ट ने इसे भी बाद में खारिज कर दिया।

उनका कार्यकाल आज भी उच्च कोटि के प्रशासन के लिए याद किया जाता है।  किन्तु जातिवादी ताकतों को एक ठाकुर का मुख्यमन्त्री बनना रास नही आया और इसी कारण मुख्यमन्त्री के रूप में जबरदस्त सफलता के बावजूद बीजेपी की हार हुई।
अगर राजनाथ सिंह को यूपी के मुख्यमन्त्री पद पर कार्य करने हेतु एक कार्यकाल और मिल जाता तो आज यूपी की ये दुर्दशा नही होती।

2003 में राजनाथ सिंह जी को केंद्रीय कृषि मंत्री बनाया गया। इस छोटे से कार्यकाल में उन्होंने अनेक योजनाए शुरू करी। किसान क्रेडिट कार्ड योजना इन्हीं की देन है। किसान कॉल सेंटर और खेती आय बीमा योजना भी इन्होंने ही शुरू करी थी। इसके अलावा किसानो को लोन देने में ब्याज दर में कमी और किसान आयोग प्रथम बार स्थापित करने का श्रेय भी राजनाथ सिंह जी को जाता है।

2002 के बाद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जानबूझकर राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश की राजनीति से दूर रखा गया और प्रदेश में अपने जनाधारविहीन चमचो को वरीयता दी। यहां तक की अटल आडवाणी की जोड़ी ने मायावती को भाजपा के हितो के ऊपर वरीयता दी। इन कारणों से भाजपा उत्तर प्रदेश में कमजोर होती गई। इस दौरान उन्हें विभिन्न राज्यो का प्रभारी महासचिव बनाकर भेजा गया और हर जगह उन्होंने उन विपरीत परिस्थितियों में भी कमल खिलाया। राजनाथ सिंह केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उपेक्षा के बावजूद पार्टी के अनुशासित सिपाही बनकर बिना कोई रोष जताए काम करते रहे। दुसरे चुनावो में भी उनकी सभाओ के लीये उम्मीदवारो द्वारा डिमांड और उनकी सभाओ में भीड़ ने उन बेवकूफ विश्लेषकों की बोलती बन्द कर दी जो उन्हें जनाधारविहीन नेता साबित करने की कोशिश करते थे।

भाजपा जब केंद्र में घोर गुटबाजी और नेतृत्व के संकट से जूझ रही थी तो उनकी ईमानदारी, पार्टी और हिंदुत्व के प्रति प्रतिबद्धता और गुटबाजी से दूर रहने के कारणों की वजह से उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। लाल कृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज जैसे नेताओ की गुटबाजियो और अंडरखांने विरोध के बावजूद वो भाजपा में पहली बार लगातार दूसरी बार भी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए।

दूसरी बार 23 जनवरी 2013 – 09 जुलाई 2014 तक।इस बार राजनाथ सिंह ने मोदी के साथ मिलकर अपनी कुशल रणनीति से बीजेपी को प्रचण्ड बहुमत दिलाया।जीत के असली हीरो वही थे पर मोदी जी ने जीत का श्रेय अमित शाह को दे कर उन्हें राष्ट्रिय अध्यक्ष बना दिया।
अरुण जेटली और बीजेपी के ठाकुर विरोधी नेताओं ने उन्हें कई बार बदनाम करने का प्रयास किया पर वो विफल रहे।क्योंकि सब जानते हैं कि राजनाथ सिंह का चरित्र शीशे की तरह साफ़ है।

26 मई 2014 से देश के ग्रह मंत्री हैं।तब से पूर्वोत्तर के आतंकियों को म्यांमार में घुसकर मारने का निर्णय उन्ही का था।चीनी घुसपैठ और नक्सलवाद पर प्रभावी रोक लगाई।राजनाथ सिंह जी ने सीमा पर पाकिस्तान की ओर से होने वाली गोलीबारी का मुहतोड़ जवाब देने के लिए अर्धसैनिक बलों को खुली छूट दी है और कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को माकूल जवाब दिया है।
गौहत्या विधेयक के प्रबल समर्थक,पर अभी मोदी जी ने हरी झण्डी नही दी।
राजनाथ सिंह धर्मान्तरण पर पूर्ण रोक के पक्ष में हैं।

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने सर्वसम्मति से कुछ अप्रिय निर्णय लिए गये,जिनका पूरा अपयश राजनाथ सिंह ने अपने सर ले लिया।
वहीं हर प्रकार के अच्छे कार्य का श्रेय उन्होंने मोदी जी को दिया,जिससे जनता में मोदी जी का यशगान होता रहे।उनकी प्रतिभा और लौह पुरुश की छवि से प्रभावित मोदी जी ने स्वयम उनसे गृह मंत्री बनने का आग्रह किया,जिसे वो टाल नही पाए।

कुछ राजपूत भाई भी अज्ञानतावश व कुछ निजी खुन्नस के कारण उनकी आलोचना करते हैं। जबकि कुछ अन्य समाज के लोग जो राजपूतों को उच्च पद पर देखना नही चाहते,वो भी राजनाथ सिंह की अनर्गल आलोचना करते हैं।

जबकि राजनाथ सिंह बेहद ईमानदार,हिन्दुत्ववादी, जातिवाद से दूर,पक्षपात रहित लौह इरादों वाले नेता हैं।
बीजेपी के इतिहास में उनसे सफल राष्ट्रिय अध्यक्ष कोई दूसरा नही हुआ है।
प्रधानमन्त्री मोदी जी इन्हें यूपी विधानसभा चुनाव 2017 के लिए बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना चाहते हैं जिसे अभी तक राजनाथ सिंह अस्वीकार कर रहे हैं।वैसे इस समय राजनाथ सिंह यूपी के सबसे योग्य और लोकप्रिय नेताओं में हैं।
ईश्वर से प्रार्थना है कि वे सरदार पटेल की भांति सफल गृह मंत्री के रूप में इतिहास में याद किये जाए। और मोदी जी के नेत्रत्व में देश सभी संकटों से दूर रहकर उन्नति के पथ पर अग्रसर हो।

जय श्री राम,जय भारत,जय राजपूताना।